भारत ने फेफड़ों के कैंसर के इलाज को व्यवस्थित और समान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्व कैंसर दिवस से ठीक पहले 3 फरवरी 2026 को, देश में पहली बार फेफड़ों के कैंसर की देखभाल के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान, इलाज में असमानताओं को कम करना और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है।

विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर जारी हुआ दस्तावेज़
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में “Lung Cancer Treatment and Palliation: Evidence-Based Guidelines” नामक इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ का विमोचन किया। विश्व कैंसर दिवस से पहले इसे जारी करने का मकसद देश में कैंसर नियंत्रण नीतियों को मजबूत करना और इस तेजी से बढ़ती बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रारंभिक पहचान और एक समान इलाज पर विशेष ज़ोर
इन दिशानिर्देशों में कुल 15 साक्ष्य-आधारित सिफारिशें दी गई हैं, जिनमें जांच, इलाज की प्रक्रिया और उपशामक देखभाल (Palliative Care) शामिल हैं। भारत में अक्सर फेफड़ों के कैंसर की पहचान देर से होती है और अलग-अलग क्षेत्रों में इलाज की गुणवत्ता में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
ये नए दिशानिर्देश पूरे देश में एक समान चिकित्सा मानक स्थापित करने, डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करने और मरीजों को सुसंगत व गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं।
खबर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (GK Points)
- भारत ने 3 फरवरी 2026 में पहली बार फेफड़ों के कैंसर के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए
- दस्तावेज़ का नाम: “Lung Cancer Treatment and Palliation: Evidence-Based Guidelines”
- कुल 15 सिफारिशें, जिनमें जांच, उपचार और उपशामक देखभाल शामिल
- दिशानिर्देश सरकारी और निजी — दोनों स्वास्थ्य प्रणालियों में लागू करने का लक्ष्य रखते हैं