बाल-विवाह प्रथा भारतीय समाज में लंबे समय से एक अभिशाप के रूप में व्याप्त था। बाल-विवाह के विरुद्ध सर्वप्रथम भारतीय समाज सुधारक राजा राममोहन राय ने किया था। केशव चन्द्र सेन व बहरामजी मालाबारी के प्रयासों से 1872 ई. में ब्रिटिश सरकार द्वारा देशी बाल-विवाह अधिनियम पारित करवाने में सफल रहें। इस अधिनियम के तहत बालिकाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा बालकों के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई। न्युनतम ( 14-18 ) आयु से कम आयु का विवाह प्रतिबंध किया गया। एच. एस. बंगाली के प्रयासों के फलस्वरूप 1891 ई. में ब्रिटिश सरकार ने एज ऑफ कान्सेंट एक्ट पारित किया, जिसमें 12 वर्ष से कम आयु की कन्याओं के विवाह पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया।
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