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पारसनाथ पर्वत का इतिहास

By NPA
On: August 27, 2026 3:14 PM
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झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पर्वत भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। यह पर्वत न केवल झारखंड का सबसे ऊँचा पर्वत है, बल्कि जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल भी है। जैन परंपरा में इसे श्री सम्मेद शिखरजी के नाम से जाना जाता है।

पारसनाथ नाम कैसे पड़ा?

पारसनाथ पर्वत का नाम जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के नाम पर पड़ा है। जैन मान्यताओं के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ ने इसी पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण इस पर्वत को पार्श्वनाथ से जोड़कर पारसनाथ पर्वत कहा जाने लगा।

जैन धर्म में पारसनाथ पर्वत का महत्व

जैन धर्म में सम्मेद शिखरजी को सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है। जैन परंपरा के अनुसार 24 में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पर्वत पर मोक्ष या निर्वाण प्राप्त किया था। यही कारण है कि दुनिया भर से जैन श्रद्धालु इस पर्वत की यात्रा करने के लिए आते हैं।

पर्वत की चोटी और आसपास के क्षेत्र में विभिन्न तीर्थंकरों से जुड़े अनेक टोंक स्थित हैं। श्रद्धालु इन पवित्र स्थानों की यात्रा करते हुए पर्वत की परिक्रमा और वंदना करते हैं।

प्राचीन इतिहास और धार्मिक परंपरा

पारसनाथ पर्वत का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यह क्षेत्र सदियों से जैन धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। जैन साहित्य और धार्मिक परंपराओं में सम्मेद शिखर का विशेष उल्लेख मिलता है।

समय के साथ यह पर्वत केवल जैन धर्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झारखंड की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र प्राचीन काल से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

झारखंड का सबसे ऊँचा पर्वत

पारसनाथ पर्वत झारखंड राज्य की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। इसकी ऊँचाई लगभग 1,365 मीटर मानी जाती है। यह गिरिडीह जिले में स्थित है और आसपास का क्षेत्र वन एवं प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है।

पर्वत की ऊँचाई और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

सम्मेद शिखरजी की तीर्थ यात्रा

जैन श्रद्धालुओं के लिए पारसनाथ पर्वत की यात्रा केवल एक सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि एक अत्यंत पवित्र धार्मिक अनुष्ठान है। श्रद्धालु पर्वत पर स्थित विभिन्न टोंकों के दर्शन करते हैं और तीर्थंकरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

जैन समुदाय के लिए यह स्थान इतना महत्वपूर्ण है कि इसे विश्व के प्रमुख जैन तीर्थस्थलों में शामिल किया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।

पारसनाथ पर्वत और झारखंड की पहचान

पारसनाथ पर्वत झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। गिरिडीह जिले की पहचान में इस पर्वत का विशेष स्थान है। इसके आसपास पर्यटन, धार्मिक यात्राओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी विकास हुआ है।

यह पर्वत हमें झारखंड के प्राचीन इतिहास, जैन धर्म की परंपरा और भारत की विविध धार्मिक विरासत से परिचित कराता है।

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