वैज्ञानिकों ने झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के भीतरदाढ़ी गांव के पास लगभग 3.5 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में प्राचीन जीवन के संभावित जैव-रासायनिक संकेत खोजे हैं। यह खोज पृथ्वी पर जीवन की शुरुआती उत्पत्ति को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या मिला?
वैज्ञानिकों को यहां चर्ट (Chert) नामक सिलिका-समृद्ध चट्टान मिली है। इस चट्टान में काली और सफेद धारियां दिखाई देती हैं। वैज्ञानिकों के विश्लेषण में काली धारियों से प्राचीन सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों से जुड़े संभावित संकेत मिले हैं।
इन सूक्ष्मजीवों ने चट्टान की सतह पर Microbial Mat यानी सूक्ष्मजीवों की परत बनाई थी। इनके जैव-रासायनिक अवशेष चट्टान में संरक्षित रह गए।
चट्टान की उम्र कितनी है?
वैज्ञानिकों ने चट्टान की उम्र लगभग 3.497 अरब वर्ष निर्धारित की है, यानी करीब 349.7 करोड़ वर्ष।
पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 अरब वर्ष है। इसका अर्थ है कि ये चट्टानें पृथ्वी के बनने के लगभग 1 अरब वर्ष के भीतर की हैं।
खोज की सबसे बड़ी खासियत—Direct Dating
इस खोज की एक महत्वपूर्ण विशेषता चट्टान की उम्र का प्रत्यक्ष निर्धारण (Direct Dating) है।
पहले ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में मिले कुछ बेहद प्राचीन जीवन-साक्ष्यों की उम्र आसपास की चट्टानों की आयु के आधार पर अनुमानित की जाती थी। झारखंड की इस खोज में चट्टान की उम्र निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिकों ने विशेष रासायनिक संकेतों (Chemical Signatures) और भू-वैज्ञानिक विश्लेषण का उपयोग किया।
सूक्ष्मजीव क्या कर रहे थे?
कार्बन आइसोटोप के विश्लेषण से ऐसे संकेत मिले हैं कि इन प्राचीन सूक्ष्मजीवों ने कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को कार्बनिक पदार्थ में बदलने जैसी जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाई हो सकती है।
यह संकेत शुरुआती पृथ्वी पर जीवन और उसके चयापचय (Metabolism) को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसे जीवाश्म क्यों नहीं कहा जा रहा?
यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य है। वैज्ञानिक इन संकेतों को सीधे तौर पर जीवाश्म (Fossil) घोषित नहीं कर रहे हैं।
इन्हें मुख्य रूप से संभावित जैव-रासायनिक छाप (Biochemical Signature) माना जा रहा है। यानी चट्टान में मौजूद रासायनिक और संरचनात्मक पैटर्न प्राचीन सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।
इन संकेतों की जैविक उत्पत्ति की पुष्टि के लिए आगे भी वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
– स्थान: भीतरदाढ़ी गांव के पास, पोटका प्रखंड
– जिला: पूर्वी सिंहभूम, झारखंड
– चट्टान: चर्ट (Chert)
– चट्टान की आयु: लगभग 3.497 अरब वर्ष
– मुख्य संकेत: प्राचीन सूक्ष्मजीवों से जुड़े संभावित जैव-रासायनिक संकेत
– Microbial Mat: सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित परत
– महत्वपूर्ण विश्लेषण: कार्बन आइसोटोप और रासायनिक संकेत
– मुख्य वैज्ञानिक महत्व: पृथ्वी पर शुरुआती जीवन की उत्पत्ति और परिस्थितियों को समझने में मदद
– पृथ्वी की आयु: लगभग 4.54 अरब वर्ष
परीक्षा में संभावित प्रश्न
प्रश्न: झारखंड में लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने जीवन के संभावित संकेत किस जिले में मिले हैं?
उत्तर: पूर्वी सिंहभूम।
प्रश्न: इस खोज से जुड़ी चट्टान का प्रमुख प्रकार क्या है?
उत्तर: चर्ट (Chert)।
प्रश्न: प्राचीन सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाई गई परत को क्या कहा जाता है?
उत्तर: माइक्रोबियल मैट (Microbial Mat)।
प्रश्न: इस खोज का प्रमुख वैज्ञानिक महत्व क्या है?
उत्तर: पृथ्वी पर शुरुआती जीवन की उत्पत्ति और उसके विकास की परिस्थितियों को समझने में सहायता।










