
वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस ने भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए 1 जून 2026 से प्रत्यक्ष भारतीय रुपये (INR) जमा और निकासी सुविधा शुरू कर दी है। इस नई सेवा के माध्यम से भारतीय उपयोगकर्ता अपने बैंक खातों और इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) का उपयोग करके सीधे रुपये जमा और निकाल सकेंगे। इससे पहले कई निवेशकों को पीयर-टू-पीयर (P2P) नेटवर्क या अन्य माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब लेनदेन की प्रक्रिया अधिक सरल और सुरक्षित हो गई है।
कॉइनबेस दुनिया के प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों में से एक है, जिसकी स्थापना 2012 में अमेरिका में हुई थी। भारत में नई सुविधा शुरू होने के बाद कंपनी स्पॉट ट्रेडिंग, परपेचुअल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स और स्थानीय INR ऑर्डर बुक्स जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करा रही है। इससे भारतीय निवेशकों को बेहतर ट्रेडिंग अनुभव और वैश्विक स्तर की लिक्विडिटी तक पहुंच मिल सकेगी।
भारत में संचालन के लिए कॉइनबेस वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) के साथ पंजीकृत है और सभी नियामकीय नियमों का पालन कर रहा है। कंपनी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) से जुड़े कर प्रावधानों और टीडीएस नियमों का भी अनुपालन कर रही है। इससे क्रिप्टो क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेशकों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि कॉइनबेस ने 2022 में भारतीय बाजार में प्रवेश किया था, लेकिन कुछ समय बाद अपनी सेवाएं सीमित कर दी थीं। दिसंबर 2025 में कंपनी ने दोबारा भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग सेवाएं शुरू कीं और अब प्रत्यक्ष INR जमा-निकासी सुविधा जोड़कर अपने कारोबार का विस्तार किया है।
ट्रेडिंग सेवाओं के अलावा कॉइनबेस भारत के ब्लॉकचेन और डेवलपर इकोसिस्टम में भी निवेश कर रहा है। कंपनी हैकाथॉन, ग्रांट्स और फेलोशिप कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों डॉलर का निवेश कर चुकी है। इसके “Base” नेटवर्क पर हजारों डेवलपर्स विभिन्न ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स विकसित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय क्रिप्टो बाजार में भागीदारी बढ़ाने, निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।









