
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (NFHM) के अंतर्गत NFDC-NFAI ने महान फिल्म निर्देशक ऋत्विक घटक की सभी 8 फीचर फिल्मों का 4K डिजिटल रेस्टोरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह महत्वपूर्ण पहल उनके जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर की गई है। पुनर्स्थापित फिल्मों में “मेघे ढाका तारा” और “अजांत्रिक” जैसी कालजयी कृतियाँ शामिल हैं, जिनका प्रदर्शन जून 2026 में लंदन में किया जाएगा। यह कदम भारतीय सिनेमा की अमूल्य विरासत को वैश्विक स्तर पर संरक्षित और प्रस्तुत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
ऋत्विक घटक भारतीय समानांतर सिनेमा के ऐसे फिल्मकार थे जिन्होंने सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और वैचारिक संघर्ष का माध्यम बनाया। उनका जन्म 4 नवंबर 1925 को ढाका (अब बांग्लादेश) में हुआ था। भारत विभाजन की त्रासदी ने उनके जीवन और फिल्मों पर गहरा प्रभाव डाला। शरणार्थी जीवन का दर्द उनकी अधिकांश फिल्मों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
वे वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और IPTA से जुड़े रहे। उनकी फिल्मों में वर्ग संघर्ष, विस्थापन, गरीबी और सामाजिक असमानता जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति, लोक कला, पुराण और मातृ-देवी के प्रतीकों को भी अपनी फिल्मों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
ऋत्विक घटक की “विभाजन त्रयी” — “मेघे ढाका तारा”, “कोमल गांधार” और “सुवर्णरेखा” — भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती हैं। इन फिल्मों में विभाजन के बाद शरणार्थियों की पीड़ा और टूटते सामाजिक संबंधों को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है।
उन्होंने ध्वनि, लोक संगीत और प्रतीकों के अभिनव प्रयोग से भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। FTII में निदेशक रहते हुए उन्होंने मणि कौल, कुमार साहनी और जॉन अब्राहम जैसे फिल्मकारों को प्रशिक्षित किया, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय न्यू वेव सिनेमा को नई पहचान दी।










