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नीम करोली बाबा का चमत्कार एवं उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘ हनुमान अंश ‘

On: September 5, 2026 5:54 PM
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नीम करोली बाबा के संक्षिप्त जीवन परिचय :- लगभग 1900 ई. के आस-पास उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में लक्ष्मी नारायण शर्मा उर्फ लक्ष्मण दास का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जिनके माता-पिता कौशल्या देवी और दुर्गा प्रसाद शर्मा थें। 11 वर्ष की अल्प आयु में लक्ष्मण दास का विवाह कर दिया गया , लेकिन उनका मन गृहस्थ जीवन में नहीं लगा और गृह त्याग कर आध्यात्म की ओर चल पड़े।

उत्तर भारत के क्षेत्रों में साधुओं की तरह अपना जीवन बिताने लगे। अध्यात्म और साधना की कसौटी में लगे रहे। माना जाता है कि उन्हें 17 वर्ष की आयु में ही आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।

हम बात कर रहे हैं – ‘ नीम करोली बाबा ‘ की जिनके आध्यात्म और जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म बनी है – ‘ हनुमान अंश ‘।

लक्ष्मण दास कैसे बने ‘ नीम करोली बाबा ‘ ? मैं आपको बताता हूं, उनके जीवन की एक चमत्कारी घटना के बारे में। वैसे तो उनके जीवन में बहुत से चमत्कार हुएं हैं।

चमत्कार :- लक्ष्मण दास ( महाराज जी ) एक बार बिना टिकट ट्रेन की यात्रा कर रहे थे, कि TTE ने उनसे टिकट मांगा। टिकट न होने के कारण TTE ने उन्हें ट्रेन से उतार दिया। यह घटना उत्तरप्रदेश के फर्रूखाबाद जिले अंतर्गत एक छोटे से रेलवे स्टेशन जिसका नाम ‘ नीमकरली ‘ था। बाबा ट्रेन से उतरने के बाद उपनी चादर बिछा कर लेट गये। ट्रेन को जब गन्तव्य स्थान के लिए चालु किया गया, तो ट्रेन स्टार्ट नहीं हुई। लगभग एक-डेढ़ घंटे रेलकर्मियों ने प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। तब रेलकर्मियों और पदाधिकारियों को अचानक ध्यान गया कि, कहीं बाबा के चलते तो ऐसा नहीं न हो रहा है। और रेलकर्मियों ने उनसे क्षमा मांगी, उन्हें ( महाराज जी ) को ट्रेन में बिठाया और ट्रेन गन्तव्य स्थान के लिए प्रस्थान करी। इसी घटना के बाद उन्हें ‘ नीम करोली बाबा ‘ के नाम से जाना जाने लगा।

कैंची धाम की स्थापना :- 1960 ई. के दशक में नीम करोली बाबा ने उत्तराखंड के नैनीताल के निकट अल्मोड़ा-नैनीताल मार्ग पर एक सुंदर घाटी के बीच एक आश्रम की स्थापना की जिसे ‘ कैंची धाम ‘ के नाम से जाना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु लोग धाम दर्शन को आते हैं।

नीम करोली बाबा का मुख्य उपदेश : बाबा सभी से उपदेश के रूप में कहा करते थें ” सब से प्रेम करो, सबकी सेवा करो, भगवान को याद करो और हमेशा सच्च बोलो” ।

उनके लाखों भक्तों में से कुछ भक्त विदेशी भी रहे हैं: उनके भक्तों में एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसे महान हस्तियां शामिल हैं।

महासमाधि:- नीम करोली बाबा अपने जीवन के अंतिम दिन में वृंदावन बिताए थें, जहां उन्होंने 11 सितंबर, 1973 ई. को ( महासमाधि ) अपने शरीर का त्याग किया।

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