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पलामू का प्रथम सांसद : जेठन सिंह खरवार का जीवन परिचय

By NPA
On: April 14, 2026 3:55 AM
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भारत की आज़ादी के बाद जब 1952 में पहला आम चुनाव हुआ, तब पूरे देश में लोकतंत्र की नींव पड़ी। इसी ऐतिहासिक चुनाव में पलामू लोकसभा क्षेत्र से प्रथम सांसद के रूप में श्री जेठन सिंह चुने गए। जेठन सिंह सिर्फ एक सांसद ही नहीं बल्कि किसानों, मज़दूरों और गरीब जनता की आवाज़ थे। उनका नाम आज भी पलामू के इतिहास और राजनीति में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

जेठन सिंह का प्रारंभिक जीवन

जेठन सिंह खरवार का जन्म वर्ष 1917 में पलामू जिला (अब गढ़वा) के रंका थाना क्षेत्र के राजबांस गांव में हुआ था। शादी के बाद वे रंका के बरवाडीह गांव में आकर बस गए। उनकी शुरुआती पढ़ाई रंका के वर्नाकुलर मिडिल स्कूल से हुई थी। औपचारिक शिक्षा भले ही ज्यादा नहीं रही, लेकिन आज़ादी के लिए उनका जज़्बा बेहद मजबूत था।

First mp of palamu

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

  • जेठन सिंह महात्मा गांधी और कांग्रेस के विचारों से प्रेरित थे।
  • उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया और ग्रामीण जनता को संगठित किया।
  • उनकी सक्रियता ने उन्हें स्थानीय स्तर पर एक लोकप्रिय नेता बना दिया।

12 साल की उम्र में कांग्रेस जॉइन, 4 बार जेल गए

कम उम्र में ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत जेठन सिंह खरवार ने महज 12 साल की उम्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े।

राजनीतिक संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका लगातार बढ़ती गई। 1932 से 1935 के बीच वे रंका थाना कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे। इसके बाद 1936 में उन्हें डालटनगंज कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।

आजादी की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी की वजह से उन्हें अंग्रेजी हुकूमत का गुस्सा भी झेलना पड़ा। 1930, 1938, 1939 और 1942 में उन्हें कुल चार बार जेल जाना पड़ा।

देश आज़ाद होने के बाद भी उनका जनसेवा का सफर जारी रहा। 1952 से 1957 तक जेठन सिंह खरवार पलामू के पहले सांसद बने और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनकी जिंदगी आज भी युवाओं के लिए संघर्ष, साहस और समर्पण की मिसाल है।

प्रथम आम चुनाव और सांसद बनना

  • 1952 के पहले आम चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन्हें पलामू से उम्मीदवार बनाया।
  • जनता ने उन्हें अपना सच्चा प्रतिनिधि मानते हुए संसद भेजा।
  • इस तरह वे पलामू के पहले सांसद (First MP of Palamu) बने।

संसदीय जीवन और योगदान

जेठन सिंह का संसदीय कार्यकाल जनता की समस्याओं पर आधारित था।

  • किसानों के लिए सिंचाई और खेती की सुविधाओं की मांग की।
  • ग्रामीण शिक्षा और स्कूलों के प्रसार पर जोर दिया।
  • सड़क और परिवहन के साधनों की कमी को संसद में उठाया।
  • पलामू जैसे पिछड़े क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की आवाज़ उठाई।

व्यक्तित्व और कार्यशैली

  • जेठन सिंह बेहद सरल और ईमानदार नेता थे।
  • वे अक्सर गाँव-गाँव जाकर जनता की समस्याएँ सुनते थे।
  • उनकी पहचान “गाँव और गरीबों के नेता” के रूप में थी।

विरासत

  • जेठन सिंह का नाम पलामू की राजनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
  • वे पलामू के पहले सांसद होने के साथ-साथ ईमानदार और सेवा-भावी जननायक थे।
  • उनकी विरासत आने वाली पीढ़ी को राजनीति में सेवा और ईमानदारी का संदेश देती है।

पलामू का प्रथम सांसद जेठन सिंह केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं थे, बल्कि वे जनता के सच्चे सेवक थे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि राजनीति का असली उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज की सेवा है। आज भी पलामू की जनता उन्हें गर्व और सम्मान के साथ याद करती है।

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