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सिक्किम में लागू हुआ आनंद विवाह अधिनियम 1909: अब सिख विवाहों को मिलेगी अलग कानूनी पहचान

By NPA
On: May 21, 2026 1:57 AM
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भारत में सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से आनंद विवाह अधिनियम, 1909 को सिक्किम में पूरी तरह लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

आनंद विवाह अधिनियम

इस फैसले के बाद अब सिक्किम में रहने वाले सिख समुदाय को अपने विवाह की कानूनी मान्यता के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सिख विवाह अब “आनंद कारज” परंपरा के अनुसार अलग कानूनी ढांचे में पंजीकृत किए जा सकेंगे।

क्या है आनंद विवाह अधिनियम, 1909?

आनंद विवाह अधिनियम पहली बार 22 अक्टूबर 1909 को ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सिख विवाह परंपरा “आनंद कारज” को कानूनी मान्यता देना था।

उस समय सिख समुदाय में यह मांग उठ रही थी कि उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न विवाहों को अलग पहचान दी जाए। इसी उद्देश्य से यह कानून बनाया गया था।

2012 में हुआ बड़ा संशोधन

शुरुआती कानून में केवल विवाह की वैधता को मान्यता दी गई थी, लेकिन विवाह पंजीकरण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी।

इसके बाद वर्ष 2012 में संसद ने आनंद विवाह (संशोधन) अधिनियम पारित किया। इस संशोधन के जरिए राज्यों को सिख विवाहों के पंजीकरण के लिए अलग नियम बनाने का अधिकार दिया गया।

हालांकि कई राज्यों ने लंबे समय तक आवश्यक नियम लागू नहीं किए, जिसके कारण सिख समुदाय को मजबूरी में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण कराना पड़ता था।

सिक्किम में क्यों बना यह बड़ा मुद्दा?

सिक्किम सहित कई राज्यों में प्रशासनिक नियमों की कमी के कारण सिख जोड़ों को अलग धार्मिक पहचान के बावजूद हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण कराना पड़ता था।

इससे सिख समुदाय की विशिष्ट धार्मिक पहचान प्रशासनिक रूप से अलग नहीं दिख पाती थी। लंबे समय से समुदाय इस व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आया बदलाव

सितंबर 2025 में “अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ” मामले में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने उन राज्यों को फटकार लगाई जिन्होंने अब तक आवश्यक नियम नहीं बनाए थे।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्यों को जल्द से जल्द नियमावली तैयार कर सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

इसके बाद सिक्किम सरकार ने “सिक्किम आनंद कारज पंजीकरण नियम, 2026” अधिसूचित किए। अब केंद्र सरकार की अधिसूचना के साथ यह कानून 1 जून 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा।

नए नियमों के तहत क्या होंगे प्रावधान?

1. विवाह रजिस्ट्रार की नियुक्ति

राज्य सरकार उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या उससे ऊपर के अधिकारी को विवाह रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी।

2. जरूरी दस्तावेज

विवाह पंजीकरण के लिए इन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

  • गुरुद्वारे या अधिकृत ग्रंथी द्वारा जारी आनंद कारज प्रमाण पत्र
  • दूल्हा-दुल्हन का आयु प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • दो गवाहों की उपस्थिति

3. दोबारा पंजीकरण की जरूरत नहीं

कानून की धारा 6(5) के अनुसार, एक बार आनंद विवाह अधिनियम के तहत पंजीकरण होने के बाद किसी अन्य कानून के तहत दोबारा विवाह पंजीकरण की मांग नहीं की जा सकेगी।

सिख समुदाय के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

यह कदम केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।

इससे सिख समुदाय को अपनी अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह पंजीकरण का अधिकार मिलेगा। साथ ही यह भारत के बहुलवादी और संवैधानिक ढांचे को भी मजबूत करता है।

संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 से जुड़ा महत्व

यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की भावना को मजबूत करता है।

इन अनुच्छेदों के तहत नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है। आनंद विवाह अधिनियम का लागू होना इन्हीं संवैधानिक अधिकारों का व्यावहारिक रूप माना जा रहा है।

अभी भी बनी हुई हैं कुछ चुनौतियां

हालांकि यह कानून सिख विवाहों को अलग कानूनी पहचान देता है, लेकिन इसमें तलाक, गुजारा भत्ता और वैवाहिक विवादों के समाधान से जुड़े प्रावधान शामिल नहीं हैं।

ऐसी स्थिति में सिख समुदाय को अभी भी तलाक या अन्य वैवाहिक मामलों के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 का सहारा लेना पड़ता है।

इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि आनंद विवाह अधिनियम अभी पूरी तरह स्वतंत्र वैवाहिक संहिता नहीं बन पाया है।

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