
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय रहो’ पहल की शुरुआत की है। हाल ही में इस योजना के अंतर्गत तीन दिवसीय “ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स” (ToT) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति प्रशिक्षित करना है।
‘निर्भय रहो’ एक राष्ट्रीय स्तर की पहल है, जिसे मुख्य रूप से निर्भया कोष के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को हिंसा-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना तथा पंचायत स्तर पर लैंगिक उत्तरदायी शासन को मजबूत बनाना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के लगभग 32 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर महिला अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा तंत्र के प्रति जागरूक किया जाएगा।
इस पहल को 11 मार्च 2026 को “सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान” की पहली वर्षगांठ पर आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया था। इसके संचालन में पंचायती राज मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) तथा अन्य प्रमुख संस्थान सहयोग कर रहे हैं।
योजना के तीन प्रमुख घटक हैं— निर्भय नेत्री, निर्भय चेतना और निर्भय दृष्टि। ‘निर्भय नेत्री’ के तहत महिला जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। ‘निर्भय चेतना’ पुरुष प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता और महिला सम्मान के प्रति संवेदनशील बनाएगी। वहीं ‘निर्भय दृष्टि’ के माध्यम से संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाकर तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका कैस्केडिंग प्रशिक्षण मॉडल है, जिसके अंतर्गत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाते हैं जो आगे राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण में मॉक कोर्ट, रोल-प्ले, केस स्टडी और व्यावहारिक अभ्यास शामिल किए जाते हैं।
‘निर्भय रहो’ पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षा और न्याय दिलाने में सहायक होगी, बल्कि महिला नेतृत्व को मजबूत कर ‘सरपंच पति’ जैसी प्रथाओं को भी कमजोर करेगी। साथ ही यह भारत को सतत विकास लक्ष्य (SDG-5 और SDG-16) हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगी।




