बिरसा मुंडा जिन्हें भगवान बिरसा मुंडा भी कहा जाता है, एक महान जननायक, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थें। बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 ई. को वर्तमान झारखंड के खूॅंटी जिला के अंतर्गत उलिहातु नामक गांव में एक मुंडा जनजाति परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम करमी हतु ( मुंडा ) और सुगना मुंडा था।
अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे बिरसा मुंडा बचपन में पास के जंगलों में गाय बकरियों के साथ गुजारी। तब उन्हें बांसुरी बजाने एवं कंधे पर तीर-धनुष धारन करने का शौक़ था।
बिरसा मुंडा के मामा उन्हें अपने घर ले गये ताकि उनकी पढ़ाई-लिखाई हो सके। उनकी प्रारंभिक शिक्षा चाईबासा के जर्मन मिशनरी स्कूल में हुई। बिरसा मुंडा समाज में फैली कुप्रथाओं को दूर किया और नए पंथ ‘ बिरसायित ‘ की शुरुआत की । उन्होंने नारा दिया था – ” अबुआ-दिशुम, अबुआ राज ” ।
बिरसा मुंडा 1899 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ’ बिरसा आंदोलन ‘ ( उलगुलान ) चलाया। अंग्रेजों ने 3 फरवरी, 1899 को गिरफ्तार कर राॅंची जेल में डाल दिया।
9 जून, 1900 ई. को मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल में रहस्यमय परिस्थिति में उनका निधन हो गया। अंग्रेजों ने उनके निधन का कारण हैजा की बीमारी बताया।
उनके सम्मान में भारतवर्ष में हर साल 15 नवंबर को ‘ जनजातीय गौरव दिवस ‘ के रूप में मनाया जाता है।





