‘ पारसनाथ ‘ झारखंड राज्य के पूर्व में गिरीडीह जिले में स्थित एक प्रसिद्ध, प्राचीन और पवित्र पर्वत है। पारसनाथ पहाड़ी झारखंड की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 1365 मीटर ( 4,480 फीट ) है। पारसनाथ पहाड़ का निर्माण प्राचीन आर्कियन युग में क्रिस्टलीय, रूपांतरित और ग्रेनाइट चट्टान से हुआ है।
यहा जैन धर्म एवं स्थानीय संथाली आदिवासियों के लिए अत्यंत पूज्य स्थल है। इसे सम्मेद शिखर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जैन-धर्म के 24 तीर्थांकरों में से 20 तीर्थांकर का पारसनाथ पवित्र पर्वत पर निर्वाण ( मोक्ष ) प्राप्त हुआ था।
जैन-धर्म में कुल 24 तीर्थांकर हुए – प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और 24वें यानी अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर थें। भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के संस्थापक थें।
जैन-धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण की प्राप्ति इसी सम्मेद शिखर पर हुआ था, उनके नाम पर ही इस पहाड़ का नाम ‘ पारसनाथ ‘ पड़ा।
पर्वत के शिखर ( मंदिर तक ) तक पहुंचने के लिए मधुबन से करीब 10 किलोमीटर की पैदल या पालकी यात्रा करनी होती है।






