गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से जब 9 जनवरी, 1915 को स्वदेश भारत लौटे इन्होंने अपना पहला सफल सत्याग्रह 1917 ई. में बिहार के चम्पारण जिले में कृषि ( नील की खेती ) से जुड़े अंग्रेज़ों के खिलाफ किया था।
अखिल भारतीय कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन ( 1916 ई. ) में राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी से चम्पारण की समस्याओं और अंग्रेजों का अत्याचार के बारे में जानकारी दी एवं चम्पारण आने का आग्रह किया। चम्पारण में किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्सा पर नील की खेती करना अनिवार्य था। इसे तिनकठिया पद्धति कहते है। इस आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी ने राजेंद्र प्रसाद, बृजकिशोर, महादेव देसाई, नरहरि पारिख तथा जे. बी. कृपलानी के सहयोग से सफल सत्याग्रह किया ।







