यह माना जाता है कि 5वीं शताब्दी ईस्वी में शाही गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद छोटानागपुर क्षेत्र में एक नई सत्ता के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। साम्राज्य के विघटन से उत्पन्न राजनीतिक शून्य ने स्थानीय जनजातीय समूहों को एक नए नेतृत्व की खोज करने के लिए प्रेरित किया। इन्हीं परिस्थितियों में छोटानागपुर क्षेत्र की पारंपरिक कथाओं और वंशावलियों में दर्ज नगवंशी राजवंश का उदय होता है, जिसकी स्थापना का श्रेय फणीमुकुट को दिया जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार फणीमुकुट को छोटानागपुर राज का प्रथम राजा चुना गया। माना जाता है कि उनके नेतृत्व में इस क्षेत्र में प्रशासनिक ढाँचे और सामाजिक व्यवस्था को संगठित रूप मिला। फणीमुकुट ने नगवंशी शासन की नींव रखी, जो आगे चलकर रांची, लोहरदगा, गुमला, पलामू सहित व्यापक क्षेत्र में विस्तारित हुआ और कई शताब्दियों तक यहाँ की राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करता रहा।