प्रस्ताव का सारांश:
अमेरिकी सीनेट द्वारा पेश किए गए ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट (OBBB)’ के संशोधित संस्करण में विदेशी धन प्रेषण (Remittance) पर प्रस्तावित कर को 5% से घटाकर 1% कर दिया गया है।
यह कर अब केवल नकद माध्यमों से भेजे गए रेमिटेंस पर लागू होगा, जबकि बैंक खाते, डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स व अन्य डिजिटल माध्यमों से भेजे गए रेमिटेंस को छूट दी गई है।
भारत पर संभावित प्रभाव:
✅ सकारात्मक पहलू:
- रेमिटेंस पर न्यूनतम कर (1%):
- प्रारंभिक 5% प्रस्ताव की तुलना में यह कर बेहद कम है, जिससे रेमिटेंस पर प्रभाव सीमित रहेगा।
- डिजिटल माध्यमों को छूट मिलने से प्रवासी भारतीयों के प्रेषण व्यवहार में बड़ी बाधा नहीं आएगी।
- डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा:
- नकद के बजाय बैंकिंग चैनलों के ज़रिये रेमिटेंस भेजने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता आएगी।
- भारत का मजबूत रेमिटेंस नेटवर्क:
- RBI के अनुसार, भारत ने FY 2024–25 में $135.46 अरब का रेमिटेंस प्राप्त किया, जिसमें अमेरिका की प्रमुख हिस्सेदारी है। इस नए प्रावधान से कुल रेमिटेंस में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।
संभावित जोखिम:
- नकद रेमिटेंस पर कर:
- जिन प्रवासी भारतीयों द्वारा नकद माध्यमों से रेमिटेंस भेजा जाता है, उनके लिए यह अतिरिक्त लागत का कारण बन सकता है।
- इससे कुछ हद तक गैर-आधिकारिक चैनलों (जैसे हवाला) की ओर झुकाव बढ़ सकता है।
- लंबी अवधि में नीति बदलाव की आशंका:
- यदि भविष्य में कर दरें बढ़ाई जाती हैं या छूट सीमित की जाती है, तो यह भारत के रेमिटेंस फ्लो पर दबाव डाल सकता है।
नीतिगत सन्दर्भ में OBBB एक्ट के अन्य प्रमुख प्रावधान:
- कर राहत:
- आयकर और संपत्ति कर की कटौतियाँ स्थायी की गई हैं।
- ओवरटाइम, टिप्स, और सोशल सिक्योरिटी आय पर अतिरिक्त कर छूट।
- $30,000–$80,000 आय वालों को संभावित 15% कर छूट।
- अन्य पहलें:
- सीमा सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण के लिए अधिक बजट।
- वित्तीय पारदर्शिता, सरकारी खर्च की निगरानी, और ऋण सीमा में वृद्धि।
निष्कर्ष:
संशोधित रेमिटेंस टैक्स प्रस्ताव से भारत को तत्काल कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा, क्योंकि:
- डिजिटल माध्यमों को छूट दी गई है,
- कर दर नाममात्र (1%) है।
हालाँकि, भारत को प्रवासी भारतीयों को औपचारिक चैनलों से रेमिटेंस भेजने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और गैर-कानूनी माध्यमों की निगरानी को और मज़बूत करना होगा।