इतिहास में द्वितीय अशोक के नाम से किसे जाना जाता है ?
कुषाण वंश के महान शासक कनिष्क को कुशल प्रशासनिक व्यवस्था व नेतृत्व के कारण इतिहासकार कनिष्क को द्वितीय अशोक बताया है। रोमन सम्राट की भांति कनिष्क के कैंसर/ सीजर की उपाधि धारण की तथा शकों की भांति क्षत्रप व्यवस्था लागू की। कनिष्क के राजकवि अश्वघोष ने बुद्धचरित तथा राजवैद्य चरक ने चरक संहिता की रचना की। कनिष्क के शासनकाल के दौरान बौद्धधर्म महायान और हीनयान में विभाजित हुआ।
कनिष्क का राज्याभिषेक – कनिष्क के राज्याभिषेक की तिथि को सन् 1960 में आयोजित पुरातत्व विभाग के द्वितीय सम्मेलन में आम सहमति से 78 ई. को स्वीकार किया गया। 78 ई. से ही शक संवत् का प्रारंभ माना गया है। कनिष्क ने कैसर या सीजर की उपाधि धारण की। इसकी प्रथम राजधानी पेशावर एवं द्वितीय राजधानी मथुरा थी।










