1857 ई. के विद्रोह को भारत की प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के रूप में देखा जाता है। यह आंदोलन 10 मई, 1857 ई. को उत्तर प्रदेश में मेरठ के सैनिकों द्वारा शुरू किया गया, जब 28 मार्च,1857 को मंगल पाण्डेय द्वारा बंगाल के एक अंग्रेज सैनिक छावनी में सेना के अधिकारियों को गोली मारी गई थी। मंगल पाण्डेय और उनके साथियों ने गाय और सुअर की चर्बी लगे कारतूसों के विरोध में यह कदम उठाये थें। और 4 अप्रैल,1857 ई. को अंग्रेजों द्वारा मंगल पाण्डेय को फांसी दे दी गई थी। धीरे-धीरे यह विद्रोह भारत के अधिकतर हिस्सों में आग की तरह फैल गई थी। इस विद्रोह का प्रमुख केंद्र बना था – दिल्ली, अवध, बनारस, बिहार , झारखंड, इलाहाबाद, कानपुर, बरेली, जगदीशपुर, झांसी, ….आदि। दिल्ली में जाकर सैनिकों और आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को समाप्त कर के बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित कर दिया था। वीर सावरकर ने 1857 ई. की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन कहा है।
हालांकि इसे – भारत का प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन, सिपाही विद्रोह, भारत की महान क्रांति, 1857 का विद्रोह, के नाम से भी जाना जाता है।
इस आंदोलन के कई कारण थें जैसे: धार्मिक कारण, सांस्कृतिक कारण, आर्थिक कारण, राजनीतिक कारण, सैन्य कारण, परन्तु तत्कालीन कारण एनफिल्ड राइफल में लगने वाले कारतूस में गाय और सुअर का चर्बी का प्रयोग माना जाता है।