कालबैशाखी (Kalbaishakhi), जिसे वैज्ञानिक रूप से ‘नॉरवेस्टर’ (Nor’westers) कहा जाता है, एक अत्यंत तीव्र और स्थानीय गरज-तूफान है जो मार्च से मई के बीच पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत तथा बांग्लादेश में देखने को मिलता है। हाल ही में 26–27 अप्रैल 2026 को बांग्लादेश में आए ऐसे ही भीषण तूफान के दौरान कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई। इस तूफान की खासियत है तेज हवाएं, बिजली, भारी वर्षा और कभी-कभी ओलावृष्टि, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
नामकरण, उत्पत्ति और विशेषताएं
‘कालबैशाखी’ शब्द बंगाली भाषा से लिया गया है, जहाँ ‘काल’ का अर्थ आपदा और ‘बैशाख’ का अर्थ अप्रैल–मई का महीना होता है। यानी यह “बैशाख महीने की आपदा” को दर्शाता है। ये तूफान मुख्य रूप से छोटा नागपुर पठार क्षेत्र में गर्म और शुष्क परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होते हैं। जब उत्तर-पश्चिम से ठंडी और शुष्क हवा तथा बंगाल की खाड़ी से आने वाली गर्म और नम हवा आपस में टकराती हैं, तो वातावरण में अस्थिरता पैदा होती है और क्यूम्यूलोनिंबस बादल बनते हैं। इसी से तेज तूफान विकसित होता है, जिसकी हवा की गति सामान्यतः 65–80 किमी/घंटा होती है, जो कभी-कभी 100 किमी/घंटा से भी अधिक हो सकती है।
प्रभावित क्षेत्र और कारण
कालबैशाखी तूफान मुख्य रूप से भारत और बांग्लादेश में प्रभाव डालता है। भारत में पश्चिम बंगाल सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जबकि असम, ओडिशा, बिहार, झारखंड और त्रिपुरा भी इसके दायरे में आते हैं। इसके अलावा दक्षिणी नेपाल और भूटान के कुछ हिस्सों में भी इसका असर देखा जाता है। इस तूफान के प्रमुख कारणों में गर्मियों के दौरान तीव्र तापन, निम्न वायुदाब का निर्माण और विभिन्न वायु द्रव्यमानों का टकराव शामिल है।
प्रभाव और महत्व
हालांकि कालबैशाखी तूफान कई बार जान-माल की हानि करता है और पेड़ों व घरों को नुकसान पहुँचाता है, फिर भी इसका कृषि में महत्वपूर्ण योगदान है। इसकी वर्षा जूट, धान, चाय और आम की फसल के लिए बेहद लाभकारी होती है। सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका महत्व है, खासकर बंगाल में इसे नवीनीकरण और शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके अचानक आने वाले ठंडे झोंके और काले बादलों ने कई कवियों, विशेष रूप से रवींद्रनाथ टैगोर, को प्रेरित किया है।
कालबैशाखी तूफान: मुख्य तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अन्य नाम | नॉरवेस्टर (Nor’westers), बोरदोईसिला (असम) |
| समय | मार्च से मई (मानसून-पूर्व) |
| उत्पत्ति क्षेत्र | छोटा नागपुर पठार |
| हवा की गति | 65–100 किमी/घंटा |
| प्रमुख क्षेत्र | पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, झारखंड, बांग्लादेश |
| मुख्य कारण | गर्म व ठंडी हवाओं का टकराव |
| प्रभाव | भारी वर्षा, बिजली, तेज हवाएं, कृषि लाभ |