झारखंड में जनजातियों की जनसंख्या वितरण को देखें तो संथाल (Santhal) राज्य की सबसे बड़ी जनजाति है। 2011 की जनगणना के अनुसार संथाल झारखंड की कुल अनुसूचित जनजाति आबादी का लगभग 34% हिस्सा बनाते हैं, इसलिए जनसंख्या के आधार पर यह झारखंड की सबसे प्रमुख जनजाति मानी जाती है। संथाल मुख्य रूप से संथाली भाषा बोलते हैं और संथाल परगना क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनके बाद जनसंख्या के आधार पर उरांव (Oraon/Kurukh) और मुंडा (Munda) जनजातियाँ आती हैं, जिनमें उरांव लगभग 19–20% और मुंडा लगभग 14–15% के आसपास ST आबादी में योगदान रखते हैं। इनके अतिरिक्त हो, खड़िया, भूमिज, महली, लोहड़ा, बिरहोर और अन्य कई जनजातियाँ भी झारखंड में पाई जाती हैं, लेकिन इनकी संख्या संथाल, उरांव और मुंडा की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। कुल मिलाकर संथाल झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है और उरांव तथा मुंडा क्रमशः दूसरी और तीसरी प्रमुख जनजातियों के रूप में मानी जाती हैं।
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